काठमांडू: नेपाल में आई भीषण बाढ़ और जल प्रलय के बाद हजारों परिवारों की जिंदगी अपनों की तलाश में थम गई है। कोई अस्पतालों के चक्कर लगा रहा है तो कोई मॉर्चरी के बाहर परिजनों की तस्वीरें लेकर खड़ा है। लोगों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि लापता परिजनों का आखिर पता कहां चलेगा। कई परिवार अब यह कहने को मजबूर हैं कि अगर उनके अपने जिंदा नहीं हैं तो कम से कम उनका शव ही मिल जाए, ताकि उन्हें अंतिम बार देख सकें और अंतिम संस्कार कर सकें।
काठमांडू के त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल के बाहर लापता रिश्तेदारों की तस्वीरें लेकर खड़ी एक महिला ने वहां मौजूद पत्रकारों से पूछा, “क्या आपके कैमरे हमारे लोगों को वापस ला पाएंगे?” उसके हाथ में अपने लापता परिजनों की तस्वीरें थीं और आंखों में उनके लौटने की उम्मीद। महिला ने कहा कि अब उनके पास उम्मीद के अलावा कुछ नहीं बचा है।
अस्पताल के बाहर लापता लोगों की तस्वीरों का सहारा
नेपाली टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार दिल कुमारी मसरांगी मगर अपने लापता जीजा और भांजे की तस्वीरें अस्पताल के गेट के बाहर लगा रही थीं। उनके आसपास मृतकों की तस्वीरें और लापता लोगों के नामों की लंबी सूचियां लगी थीं। वह अपनी कहानी पत्रकारों तक पहुंचाना चाहती थीं, ताकि संभव हो तो किसी ऐसे व्यक्ति तक खबर पहुंचे जिसने उनके परिजनों को कहीं देखा हो।
दिल कुमारी ने कहा कि अब उम्मीद करना ही उनके पास बचा है। अगर उनके परिजन वापस नहीं आ सकते और केवल उनके शव मिलते हैं, तो कम से कम परिवार को यह पता चल जाएगा कि वे कहां हैं। त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल के बाहर इन दिनों ऐसे कई परिवार पहुंच रहे हैं। किसी के हाथ में बेटे की तस्वीर है, तो कोई भाई, पति या पिता की तलाश में अस्पतालों के चक्कर लगा रहा है।
तीन दिन तक अस्पतालों में भाई को खोजती रही बहन
लापता लोगों की तलाश सिर्फ एक अस्पताल तक सीमित नहीं है। माईरिपब्लिका की रिपोर्ट के मुताबिक, सिंधुपालचोक के चौतारा की रहने वाली सोनिया केसी अपने लापता भाई शिवराम को खोजने के लिए लगातार तीन दिनों तक काठमांडू के अलग-अलग अस्पतालों में पहुंचती रहीं। उनकी तीन बहनें और एक अन्य भाई भी इस तलाश में उनके साथ लगे हुए हैं।
परिजनों ने चितवन में रहने वाले रिश्तेदारों से नारायणी नदी के किनारे भी शिवराम की तलाश करने को कहा है। सोनिया का कहना है कि जब तक भाई का पता नहीं चलता, तब तक उनके भीतर उसके मिलने की उम्मीद बनी रहेगी।
अंतिम खबर का इंतजार, हजारों परिवारों की जिंदगी थमी
लोकमाया योंजन अपने 35 वर्षीय दामाद सोम बहादुर तमांग की तलाश कर रही हैं। सोम स्याफ्रुबेसी से परिवार से संपर्क करने के बाद लापता हो गए। लोकमाया के मुताबिक, उनके साथ यात्रा कर रहे छह लोगों में से बाद में सिर्फ एक व्यक्ति ने परिवार से संपर्क किया, जबकि बाकी लोगों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली।
बाढ़ के बाद नेपाल में हजारों परिवार इसी इंतजार में दिन काट रहे हैं। कुछ लोग अपनों के सुरक्षित लौटने की उम्मीद लगाए बैठे हैं, जबकि कुछ परिवार अब कम से कम अपने परिजनों की अंतिम खबर मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
भारतीय बचाव दल ने भी संभाला मोर्चा
नई दिल्ली: नेपाल में सुरंगों के भीतर फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए भारत की विशेष सुरंग खोज एवं बचाव टीम ने रविवार को नेपाली सेना के साथ अभियान शुरू किया। विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारतीय विशेषज्ञ दल को स्थानीय बचाव अभियान में शामिल कर लिया गया है। टीम जमीन पर नेपाली सुरक्षाबलों के साथ मिलकर फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के प्रयास में जुटी है।
